ज़मीन जल रही है फिर भी चल रहा हूँ मैं
फ़िज़ा का वक़्त हैं और फूल फल रहा हूँ मैं
हर तरफ आंधिया हैं नफरतो की मैं फिर भी
दीया हूँ प्यार का हिम्मत से जल रहा हूँ मैं
बनेगी बात नई सोच बदल कर देखो
रहो कही भी मगर ख्वाब महल के देखो
खुलेंगी खिड़किया और आसमां अपना होगा
जरा हिम्मत करो और घर से निकल कर देखो
आसमां छूलो अगर तुम तो भूल मत जाना
ये ही डोला गुरूर का है झूल मत जाना
करो भला जो किसी का तो याद मत रखना
करे तुम्हारा भला उसको भूल मत जाना
हम तो वरदान को ही शाप समझ बैठे है
सामने पुण्य है और पाप समझ बैठे है
पहले माँ बाप को दौलत ही समझते थे हम
आज दौलत को ही माँ बाप समझ बैठे है
बदलते वक़्त में ये कैसा दौर आया है
हमी से दूर हो रहा हमारा साया है
आज हम उनकी जुवा पर लगा रहे बंदिश
जिन बुजुर्गो ने हमें बोलना सिखाया है
लकीरे हाथ की जो अपनी पढ़ नहीं सकते
हवा खिलाफ हो तो उससे लड़ नहीं सकते
जो अपने घर के बुजुर्गो की करे अनदेखी
मेरा दावा है कि वो आगे बढ़ नहीं सकते
वो भी क्या दिन थे खयालो में ही खो जाते थे
कोई मजाक भी करता था तो रो जाते थे
आज तो गोलियाँ खा के भी जागते रहते
पहले तो माँ की लोरियों से ही सो जाते थे
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