Wednesday, 27 May 2026

यूं ही नहीं दीवाना अकबक होता है - मुरारी मंडल (माधव)

यूं ही नहीं दीवाना अकबक होता है। 
कुछ ख्वाबों का टूटना घातक होता है। 
यूं ही नहीं दीवाना अकबक होता है। 
कुछ ख्वाबों का टूटना घातक होता है। 
खुशियां जब भी दर पर दस्तक देती हैं। 
खुशियां जब भी दर पर दस्तक देती हैं। 
हमको अपनी किस्मत पे शक होता है।

Saturday, 23 May 2026

मरने से पहले, एक पिता ने अपने बेटे से कहा

मरने से पहले, एक पिता ने अपने बेटे से कहा: “यह घड़ी तुम्हारे दादाजी ने मुझे दी थी। यह लगभग 200 साल पुरानी है।

इसे किसी ज्वेलरी की दुकान पर ले जाओ और पूछो कि वे इसके कितने पैसे देंगे।"

Thursday, 30 October 2025

सच बात पूछती हूँ, बताओ ना, बाबू जी

सच बात पूछती हूँ, बताओ ना, बाबू जी
छुपाओ ना, बाबू जी
क्या याद मेरी आती नहीं?

Tuesday, 28 October 2025

मुक्त करता हूँ मैं, जाना चाहो अगर - मुरारी मंडल (माधव)

मुक्त करता हूँ मैं, जाना चाहो अगर
पर सभी का बदलता समय है प्रिये 
मेरा दुख वो नहीं प्रेम में जो मिले
मुफलिसी का हूं मैं तो सताया हुआ
राब्ता करना लोगों से मुश्किल है अब
मैं तो इंसान हूं मात खाया हुआ
कुछ भी सोचा हुआ कर नहीं पा रहा
ऐसा जीवन में आया प्रलय है प्रिये 
मुक्त करता हूं मैं जाना चाहो अगर।।

बाबा जानी करवट लेकर हल्की सी आवाज में बोले

बाबा जानी करवट लेकर हल्की सी आवाज में बोले बेटा कल क्या मंगल होगा गर्दन मोड़े बिन मैं बोला बाबा कल तो बुध का दिन है

बाबा जानी सुन ना पाए फिर से पूछा कल क्या दिन है थोड़ी गर्दन मोड़ के मैंने लहजे में कुछ जहर मिलाकर मुंह को कान की सीद में लाकर धाड़ के बोला बुध है बाबा बुध है बाबा आंखों में दो मोती जमके सूखे से दो होठ भी लजे लहजे में कुछ शहद मिलाकर बाबा बोले बैठो बेटा छोड़ो दिन को दिन है पूरे मुझ में तेरा हिस्सा सुन लो बचपन का एक किस्सा सुन लो यही जगह थी मैं था तुम थे तुमने पूछा रंग बिरंगी फूलों पर ये उड़ने वाली इसका नाम बताओ बाबा गाल पे बोसा देकर मैंने प्यार से बोला तितली बेटा तुमने फिर पूछा क्या बाबा मैं बोला तितली बेटा तितली
तितली कहते सुनते एक महीना पूरा गुजरा एक महीना पूछ के बेटा तितली कहना सीखा तुमने हर एक नाम जो सीखा तुमने कितनी बार वो पूछा तुमने तेरे भी तो दांत नहीं थे मेरे भी अब दांत नहीं है बातें करतेकरते तू तो थक के मेरी गोद में सो जाता था तेरे मेरे पास तो बाबा थे ना। मेरे पास तो बेटा है ना। बूढ़े से इस बच्चे के भी बाबा होते सुन भी लेते। पर मेरे पास तो बेटा है ना। तेरे पास तो बाबा थे ना। मेरे पास तो बेटा है ना।



Thursday, 9 October 2025

गुस्से की दवा.

*गुस्से की दवा..* 

एक स्त्री थी। उसे बात बात पर गुस्सा आ जाता था। उसकी इस आदत से पूरा परिवार परेशान था। उसकी वजह से परिवार में कलह का माहौल बना रहता था। एक दिन उस महिला के दरवाजे एक साधू आया। महिला ने साधू को अपनी समस्या बताई। उसने कहा, “महाराज! मुझे बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता है। मैं चाहकर भी अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख पाती। कोई उपाय बताइये।” साधू ने अपने झोले से एक दवा की शीशी निकालकर उसे दी और बताया कि जब भी गुस्सा आये। इसमें से चार बूंद दवा अपनी जीभ पर डाल लेना। 10 मिनट तक दवा को मुंह में ही रखना है। 

10 मिनट तक मुंह नहीं खोलना है, नहीं तो दवा असर नहीं करेगी।” महिला ने साधू के बताए अनुसार दवा का प्रयोग शुरू किया। सात दिन में ही उसकी गुस्सा करने की आदत छूट गयी। सात दिन बाद वह साधू फिर उसके दरवाजे आया तो महिला उसके पैरों में गिर पड़ी। उसने कहा, “महाराज! आपकी दवा से मेरा क्रोध गायब हो गया। अब मुझे गुस्सा नहीं आता और मेरे परिवार में शांति का माहौल रहता है।” तब साधू महाराज ने उसे बताया कि वह कोई दवा नहीं थी। उस शीशी में केवल पानी भरा था। 

 *शिक्षा* : गुस्से का इलाज केवल चुप रहकर ही किया जा सकता है। क्योंकि गुस्से में व्यक्ति उल्टा सीधा बोलता है, जिससे विवाद बढ़ता है। इसलिए क्रोध का इलाज केवल मौन है..!!

Saturday, 27 September 2025

इंडस नदी डॉल्फिन और माइक्रोप्लास्टिक संकट

*📌* *इंडस नदी डॉल्फिन और माइक्रोप्लास्टिक संकट*

हाल के एक शोध में खुलासा हुआ है कि इंडस नदी की डॉल्फिन अपने भोजन के साथ बड़ी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक निगल रही हैं। पांच फंसी हुई डॉल्फिन के पेट और आंतों की जांच में पाया गया कि उनके शरीर में माइक्रोप्लास्टिक, विशेष रूप से टेक्सटाइल फाइबर और पैकेजिंग में उपयोग होने वाले पीईटी (पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट) जैसे प्लास्टिक मौजूद थे। ये माइक्रोप्लास्टिक विशेष रूप से छोटी आंत में अधिक मात्रा में पाए गए। शोधकर्ताओं का मानना है कि ये माइक्रोप्लास्टिक डॉल्फिन के शरीर में सीधे निगलने या दूषित शिकार (मछलियां) के माध्यम से पहुंच रहे हैं। इंडस नदी की डॉल्फिन नदी के पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत का एक महत्वपूर्ण संकेतक हैं, और यह स्थिति नदी के बढ़ते प्रदूषण को दर्शाती है।

*परिणाम एवं चुनौतियाँ*

माइक्रोप्लास्टिक का डॉल्फिन के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ये सूक्ष्म कण आंतरिक अंगों में जमा होकर पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे भोजन अवशोषण की क्षमता कम हो सकती है। इसके अलावा, माइक्रोप्लास्टिक में मौजूद रासायनिक तत्व, जैसे बिस्फेनॉल-ए और फ्थालेट्स, हार्मोनल असंतुलन और प्रजनन क्षमता में कमी का कारण बन सकते हैं। लंबे समय तक माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क में रहने से डॉल्फिन की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। यह स्थिति न केवल डॉल्फिन, बल्कि पूरे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा है, क्योंकि माइक्रोप्लास्टिक खाद्य श्रृंखला के माध्यम से अन्य प्रजातियों तक पहुंच सकते हैं।

इंडस नदी का पारिस्थितिकी तंत्र पहले ही मानवीय गतिविधियों, जैसे औद्योगिक प्रदूषण, कृषि अपवाह और अनुपचारित सीवेज के कारण दबाव में है। माइक्रोप्लास्टिक का बढ़ता स्तर नदी के जल की गुणवत्ता को और खराब कर सकता है, जिसका असर न केवल जलीय जीवों, बल्कि नदी पर निर्भर मानव समुदायों पर भी पड़ेगा।

*आगे की राह*

इंडस नदी डॉल्फिन, जो विश्व की सबसे दुर्लभ जलीय स्तनधारियों में से एक हैं, के संरक्षण के लिए माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है। यह पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, और सतत विकास जैसे विषयों से जुड़ा है। माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण का मुकाबला करने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप, जैसे प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन, एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध, और औद्योगिक अपशिष्ट के निपटान के लिए कड़े नियम लागू करना जरूरी है। इसके अलावा, नदियों के संरक्षण के लिए सामुदायिक जागरूकता और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना होगा।
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Saturday, 20 September 2025

कितना सुंदर लिखा है किसी ने.....

कितना सुंदर लिखा है किसी ने.....

प्यास लगी थी गजब की, मगर पानी मे जहर था...
पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते !!

बस यही दो मसले, जिंदगी भर ना हल हुए,
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए !!

वक़्त ने कहा... काश थोड़ा और सब्र होता,
सब्र ने कहा... काश थोड़ा और वक़्त होता !!

शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,
पर चुप इसलिये हु कि जो दिया तूने,
वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता..!!🌸❤️🕊️

Monday, 15 September 2025

मान लीजिए कि आप चाय का कप हाथ में लिए खड़े हैं और कोई आपको धक्का दे देता है,

मान लीजिए कि आप चाय का कप हाथ में लिए खड़े हैं और कोई आपको धक्का दे देता है,
तो आपके कप से चाय छलक जाती है..

अब अगर आप से पूछा जाए कि आप के कप से चाय क्यों छलकी?

तो आप का उत्तर होगा "क्योंकि उसने ने मुझे धक्का दिया"

गलत उत्तर..

सही उत्तर ये है कि आपके कप में चाय थी इसलिए छलकी..!

आप के कप से वही छलकेगा जो उसमें है।

इसी तरह जब ज़िंदगी में हमें धक्के लगते हैं
बातों से, व्यवहार से, विचार से और स्वाभाविक प्रक्रिया से, तो उस समय हमारी वास्तविकता ही बाहर छलकती है।

आप का सच उस समय तक सामने नहीं आता, जब तक आपको धक्का न लगे, तो देखना ये है कि जब आपको धक्का लगा तो क्या छलका?

धैर्य, मौन, कृतज्ञता, स्वाभिमान, निश्चिंतता, मानवता, गरिमा, अपनत्व, सहानुभूति, संवेदना इत्यादि..

या फिर,

क्रोध, कड़वाहट, पागलपन, ईर्ष्या, द्वेष, घृणा, अराजकता, असभ्यता, असंवेदनशीलता इत्यादि..

Monday, 8 September 2025

यदि आपके पास अहंकार भाव हैं तो समझ लेना अब आपको किसी और शत्रु की जरुरत ही नहीं हैं।

यदि आपके पास अहंकार भाव हैं तो समझ लेना अब आपको किसी और शत्रु की जरुरत ही नहीं हैं।

क्योंकि अहंकार वो सब काम कर देगा 
 
जो काम शायद ही कोई महाशत्रु भी नहीं कर सकें।

अहंकार शक्तिशाली ही नहीं महा शक्तिशाली शत्रु होता हैं।

वो अहंकार ही तो था जिसके बल पर रावण ने साक्षात त्रिभुवनपति श्रीराम जी को ही चुनौती दे डाली, 

जिसके बल पर कंस ने जगत पालक को बालक मान कर उसे मारने के प्रयत्न शुरू कर दिए,

जिसके बल पर दुर्योधन ने एक सती नारी के चीर हरण करने का आदेश भरी सभा में दे दिया था,

अहंकार आग की वो धधकती लपटें हैं, जो गर्म तो नहीं मगर जलाकर राख अवश्य कर देती हैं।

अतः अहंकार में नहीं 
अपितु प्यार और उपकार में जीने का प्रयास शुरू करके अपने जीवन के अर्थ को सार्थक करें..!