वो शायराना कलम ना जाने कहा खो गयी
जो मेरे हर दुःख सुख की साथी थी !!
मेरे अरमानो को जो लिखती थी
मेरे गम को कागज़ में छुपाती थी !!
मेरे संग जो हंसती मुस्कुराती थी वो कलम बहुत सजीली थी !!
मेरी मंजिल मुझे दिखाती थी मेरे खवाब समेटे बैठी थी !!
मेरी मायूसी पे जो रोती थी
मुझे जीने की राह दिखाती थी !!
वो शायराना कलम ना जाने कहा खो गयी
जो मेरे हर दुःख सुख की साथी थी !!
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