Friday, 21 September 2018

वो शायराना कलम ना जाने कहा खो गयी


वो शायराना कलम ना जाने कहा खो गयी
जो मेरे हर दुःख सुख की साथी थी !!


मेरे अरमानो को जो लिखती थी
मेरे गम को कागज़ में छुपाती थी !!

मेरे संग जो हंसती मुस्कुराती थी वो कलम बहुत सजीली थी !!


मेरी मंजिल मुझे दिखाती थी मेरे खवाब समेटे बैठी थी !!


मेरी मायूसी पे जो रोती थी
मुझे जीने की राह दिखाती थी !!


वो शायराना कलम ना जाने कहा खो गयी
जो मेरे हर दुःख सुख की साथी थी !!

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