Tuesday, 28 October 2025

बाबा जानी करवट लेकर हल्की सी आवाज में बोले

बाबा जानी करवट लेकर हल्की सी आवाज में बोले बेटा कल क्या मंगल होगा गर्दन मोड़े बिन मैं बोला बाबा कल तो बुध का दिन है

बाबा जानी सुन ना पाए फिर से पूछा कल क्या दिन है थोड़ी गर्दन मोड़ के मैंने लहजे में कुछ जहर मिलाकर मुंह को कान की सीद में लाकर धाड़ के बोला बुध है बाबा बुध है बाबा आंखों में दो मोती जमके सूखे से दो होठ भी लजे लहजे में कुछ शहद मिलाकर बाबा बोले बैठो बेटा छोड़ो दिन को दिन है पूरे मुझ में तेरा हिस्सा सुन लो बचपन का एक किस्सा सुन लो यही जगह थी मैं था तुम थे तुमने पूछा रंग बिरंगी फूलों पर ये उड़ने वाली इसका नाम बताओ बाबा गाल पे बोसा देकर मैंने प्यार से बोला तितली बेटा तुमने फिर पूछा क्या बाबा मैं बोला तितली बेटा तितली
तितली कहते सुनते एक महीना पूरा गुजरा एक महीना पूछ के बेटा तितली कहना सीखा तुमने हर एक नाम जो सीखा तुमने कितनी बार वो पूछा तुमने तेरे भी तो दांत नहीं थे मेरे भी अब दांत नहीं है बातें करतेकरते तू तो थक के मेरी गोद में सो जाता था तेरे मेरे पास तो बाबा थे ना। मेरे पास तो बेटा है ना। बूढ़े से इस बच्चे के भी बाबा होते सुन भी लेते। पर मेरे पास तो बेटा है ना। तेरे पास तो बाबा थे ना। मेरे पास तो बेटा है ना।



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