Tuesday, 28 October 2025

यह सत्य है, परम सत्य है कि हम सब आज अपना ख्वाब जी रहे हैं। आदरणीय कुमार विश्वास सर की उपस्थिति में काव्य पाठ करना तमाम लोगों का ख्वाब है और इस ख्वाब को हकीकत बनाने का काम ये डिजिटल खिड़की और गिरीशाला ने किया है। मैं बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं। मैं गीत पढ़ने से पहले उसकी भूमिका में एक मुक्तक पढ़ता हूं। आप सबका आशीर्वाद मिले। स्वागत पढ़ो। यूं ही नहीं दीवाना अकबक होता है। कुछ ख्वाबों का टूटना घातक होता है। यूं ही नहीं दीवाना अकबक होता है। कुछ ख्वाबों का टूटना घातक होता है। खुशियां जब भी दर पर दस्तक देती हैं। खुशियां जब भी दर पर दस्तक देती हैं। हमको अपनी किस्मत पे शक होता है। [प्रशंसा] हूं मुक्त करता हूं मैं जाना चाहो अगर हाय हाय मुक्त करता हूं मैं मुक्त करता हूं मैं जाना चाहो अगर पर सभी का बदलता समय है प्रिय [संगीत] [प्रशंसा] बेटा क्या बात है जिंदाबाद जिंदाबाद [प्रशंसा] बहुत अच्छे बहुत-बहुत धन्यवाद मुरारी बेटा बहुत अच्छे पढ़ो वाह मुक्त करता हूं मैं जाना चाहो अगर पर सभी का बदलता समय है प्रिय पर सभी का बदलता समय है प्रिय मुक्त करता हूं मैं जाना चाहो अगर बंद अब बदलना तुम्हारा तो है लाजमी वाह वाह वाह लुट चुका है हमारा सहारा भी अपने कानों को तुम खोल कर सुन लो ये मन परेशान है पर नहारा भी वाह वाह वाह बहुत अच्छे अब बदलना तुम्हारा तो है लाजमी लुट टूट चुका है हमारा सहारा भी अपने कानों को तुम खोल कर सुन लो ये मन परेशान है पर नहारा भी देह मानव की ध है जिसने यहां आए हाए हा देह मानव की धारी है जिसने यहां उसका कष्टों से लड़ना तो तय है प्रिय [संगीत] मुक्त करता हूं मैं जाना चाहो अगर गीत का दूसरा और आखरी बंद है आपके समक्ष बहुत बच्चे रहो बेटा मुरारी जीते रहो बेटा देखिए दुख अलग-अलग प्रकार के होते हैं मेरा कैसा दुख है मेरे दुख वो नहीं प्रेम में जो मिले बहुत अच्छे मुफसी का हूं मैं तो सताया हुआ [प्रशंसा] [प्रशंसा] मेरे दुख वो नहीं प्रेम में जो मिले मुफलिसी किसी का मैं तो सताया हुआ राबता करना [संगीत] मात खाया हुआ कुछ भी सोचा हुआ कर नहीं पा रहा कुछ भी सोचा हुआ कर नहीं पा रहा ऐसी जीवन में आई प्रलय मुक्त करता हूं मैं जाना चाहो अगर बहुत-बहुत धन्यवाद [प्रशंसा] हट जा

No comments:

Post a Comment