Tuesday, 28 October 2025

मुक्त करता हूँ मैं, जाना चाहो अगर - मुरारी मंडल (माधव)

मुक्त करता हूँ मैं, जाना चाहो अगर
पर सभी का बदलता समय है प्रिये 
मेरा दुख वो नहीं प्रेम में जो मिले
मुफलिसी का हूं मैं तो सताया हुआ
राब्ता करना लोगों से मुश्किल है अब
मैं तो इंसान हूं मात खाया हुआ
कुछ भी सोचा हुआ कर नहीं पा रहा
ऐसा जीवन में आया प्रलय है प्रिये 
मुक्त करता हूं मैं जाना चाहो अगर।।

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