Wednesday, 27 May 2026

यूं ही नहीं दीवाना अकबक होता है - मुरारी मंडल (माधव)

यूं ही नहीं दीवाना अकबक होता है। 
कुछ ख्वाबों का टूटना घातक होता है। 
यूं ही नहीं दीवाना अकबक होता है। 
कुछ ख्वाबों का टूटना घातक होता है। 
खुशियां जब भी दर पर दस्तक देती हैं। 
खुशियां जब भी दर पर दस्तक देती हैं। 
हमको अपनी किस्मत पे शक होता है।

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