Showing posts with label मुरारी मंडल (माधव). Show all posts
Showing posts with label मुरारी मंडल (माधव). Show all posts

Wednesday, 27 May 2026

यूं ही नहीं दीवाना अकबक होता है - मुरारी मंडल (माधव)

यूं ही नहीं दीवाना अकबक होता है। 
कुछ ख्वाबों का टूटना घातक होता है। 
यूं ही नहीं दीवाना अकबक होता है। 
कुछ ख्वाबों का टूटना घातक होता है। 
खुशियां जब भी दर पर दस्तक देती हैं। 
खुशियां जब भी दर पर दस्तक देती हैं। 
हमको अपनी किस्मत पे शक होता है।

Tuesday, 28 October 2025

मुक्त करता हूँ मैं, जाना चाहो अगर - मुरारी मंडल (माधव)

मुक्त करता हूँ मैं, जाना चाहो अगर
पर सभी का बदलता समय है प्रिये 
मेरा दुख वो नहीं प्रेम में जो मिले
मुफलिसी का हूं मैं तो सताया हुआ
राब्ता करना लोगों से मुश्किल है अब
मैं तो इंसान हूं मात खाया हुआ
कुछ भी सोचा हुआ कर नहीं पा रहा
ऐसा जीवन में आया प्रलय है प्रिये 
मुक्त करता हूं मैं जाना चाहो अगर।।